समाजसेवा का उजास: एक जीवित प्रेरणा, जिसका ध्येय सेवा ही साधना
झांसी। स्वतंत्रता के बाद के भारत में समाजसेवा के अनेक अध्याय लिखे गए, पर कुछ नाम ऐसे होते हैं जो केवल कार्य नहीं करते, बल्कि समाज को देखने की दृष्टि ही बदल देते हैं। प्रस्तुत व्यक्तित्व उसी श्रेणी में आता है, जिसने समाजसेवा को औपचारिकता नहीं, बल्कि आत्मिक साधना बना दिया। जिनके लिए सेवा कोई…
