बेसिक ट्रेनिंग सेंटर (लोको), झांसी में संरक्षा संगोष्ठी का आयोजन*

*बेसिक ट्रेनिंग सेंटर (लोको), झांसी में संरक्षा संगोष्ठी का आयोजन*
आज दिनांक 09 मई 2026 को बीटीसी (लोको), झांसी में मंडल रेल प्रबंधक श्री अनिरुद्ध कुमार के मार्गदर्शन में संरक्षित एवं सुरक्षित रेल संचालन को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से संरक्षा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर (परिचालन), झांसी श्री शिवम श्रीवास्तव रहे। इस अवसर पर सहायक मंडल विद्युत इंजीनियर (परिचालन), झांसी श्री अनिरुद्ध शुक्ला भी उपस्थित रहे।
संगोष्ठी में 15 मुख्य लोको निरीक्षक, 20 लोको पायलट तथा 16 सहायक लोको पायलट सहित कुल 51 कर्मचारियों ने सहभागिता की।
सेमिनार के दौरान वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर (परिचालन), झांसी ने इंजन क्रू को एसपीएडी एवं एसआर उल्लंघन की घटनाओं से बचाव हेतु अपनाई जाने वाली सावधानियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने सिग्नल तथा टीएसआर/पीएसआर के दौरान कॉल आउट प्रक्रिया को नियमित आदत के रूप में अपनाने पर बल देते हुए इसे मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से सुरक्षित संचालन का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने डीओआर में सिग्नल, ट्रैक एवं गाड़ी संचालन से संबंधित पिन-पॉइंटेड अनियमितताओं को दर्ज करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। साथ ही इंजन क्रू को पारिवारिक एवं व्यक्तिगत परिस्थितियों के साथ संतुलन स्थापित करते हुए पूर्ण एकाग्रता से सुरक्षित रेल संचालन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने क्रू को अपने नामित मुख्य लोको निरीक्षक (CLI) से अधिकाधिक तकनीकी एवं परिचालन संबंधी जानकारी प्राप्त करने हेतु स्वयं पहल करने का संदेश दिया। प्रारंभिक एवं अंतिम स्टेशनों के यार्ड क्षेत्र में गाड़ी के प्रस्थान एवं आगमन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर भी उन्होंने विस्तृत चर्चा की।
सहायक मंडल विद्युत इंजीनियर (परिचालन), झांसी ने लोको पायलट एवं सहायक लोको पायलटों को गुणवत्तापूर्ण विश्राम (क्वालिटी रेस्ट) के महत्व से अवगत कराया तथा सुरक्षित संचालन के लिए कॉल आउट, सिग्नल के अनुरूप गति नियंत्रण एवं उचित ब्रेकिंग पैटर्न अपनाने की विस्तृत जानकारी प्रदान की।
संगोष्ठी का संचालन मुख्य क्रू नियंत्रक, झांसी श्री राजीव अग्रवाल द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में मुख्य प्रशिक्षक, बीटीसी (लोको), झांसी ने उपस्थित अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए उनके प्रेरक मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया तथा विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की संगोष्ठियां रेल संरक्षा संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध होंगी।

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