झांसी: आर्यभट्ट जयंती पर गोष्ठी आयोजित, महान गणितज्ञ के योगदान पर हुआ प्रकाश

झाँसी।
ब्रह्मविभूति स्मृति न्यास द्वारा महान गणितज्ञ आर्यभट्ट की जयंती के अवसर पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने आर्यभट्ट के जीवन एवं उनके अद्वितीय योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
संस्था के अध्यक्ष पंडित संजय दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि—
“जब जीरो दिया मेरे भारत ने, तब दुनिया को गिनती आई।”
उन्होंने बताया कि आर्यभट्ट द्वारा शून्य की अवधारणा ने गणित के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन किया, जिससे आज पूरा विश्व लाभान्वित हो रहा है।
वक्ताओं ने बताया कि आर्यभट्ट का जन्म सन् 476 ईस्वी में कुसुमपुर (पाटलिपुत्र) में हुआ था। वे प्राचीन भारत के महान खगोलशास्त्री एवं गणितज्ञ थे। उनकी प्रसिद्ध कृति ‘आर्यभटीय’ में गणित एवं खगोलशास्त्र से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण सिद्धांतों का उल्लेख मिलता है।
गोष्ठी में यह भी बताया गया कि आर्यभट्ट ने पाई (π) का सटीक मान ज्ञात किया तथा यह सिद्ध किया कि पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है। उनके योगदान आज भी विज्ञान और गणित के क्षेत्र में मार्गदर्शक बने हुए हैं।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने आर्यभट्ट को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर पं. अवधेश मकड़ारिया, अभिषेक दीक्षित पं. अशोक पाण्डेय, पं. निखिल पाठक, पं. अंकुर गोस्वामी, पं. कार्तिक पटेरिया, पं. आशीष बाजपेयी, पं. महेश शर्मा, पं. राजीव करौलिया, पं. पवन तिवारी, पं. राहुल मिश्रा मदन तिवारी, गौरव त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *