झांसी।उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक झाँसी शहर के रहने वाले प्रतिभावान फॉरवर्ड केतन कुशवाहा को आगामी पुरुष अंडर-18 एशिया कप के लिए भारतीय जूनियर हॉकी टीम की कमान सौंपी गई है। यह प्रतिष्ठित महाद्वीपीय टूर्नामेंट 29 मई से 6 जून 2026 तक जापान के काकामिगाहारा शहर (कावासाकी हैवी इंडस्ट्रीज हॉकी स्टेडियम) में आयोजित होने जा रहा है। साई (SAI) भोपाल में लगे एक महीने के कड़े ट्रेनिंग कैंप और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली कड़ी चुनौती के बाद भारतीय टीम पूरी तरह तैयार है। जापान रवानगी से ठीक पहले, कप्तान केतन कुशवाहा ने सुप्रसिद्ध खेल विश्लेषक बृजेंद्र यादव से अपनी तैयारियों, रणनीतियों और अपने गृह नगर झाँसी से जुड़े विशेष अनुभवों को साझा किया।
बृजेंद्र यादव: केतन, सबसे पहले आपको अंडर-18 एशिया कप के लिए भारतीय पुरुष हॉकी टीम का कप्तान चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई। टीम की रवानगी से ठीक पहले खिलाड़ियों का मूड और माहौल कैसा है?
केतन कुशवाहा: बहुत-बहुत धन्यवाद, बृजेंद्र जी। टीम का माहौल बहुत शानदार है और सभी खिलाड़ियों का आत्मविश्वास साफ झलकता है। एशिया कप जैसे बड़े मंच पर तिरंगे का प्रतिनिधित्व करना हम सभी के लिए बेहद सम्मान और जिम्मेदारी की बात है। हर खिलाड़ी मैदान पर उतरने के लिए बेहद उत्साहित है।
बृजेंद्र यादव: केतन, आप उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर झाँसी से आते हैं, जो अपनी वीरता के लिए जाना जाता है। झाँसी की धरती से उठकर सीधे भारतीय टीम की कप्तानी तक का यह सफर आपके लिए कितना खास है?
केतन कुशवाहा: यह मेरे और मेरे पूरे परिवार के लिए एक बेहद भावुक और गर्व का पल है। झाँसी की मिट्टी में ही मैंने हॉकी की शुरुआत की थी, और झाँसी के लोगों ने मुझे हमेशा बहुत प्यार और प्रोत्साहन दिया है। जब आप ऐसे ऐतिहासिक शहर से आते हैं, तो जुझारूपन आपके स्वभाव में अपने आप आ जाता है। कप्तानी की यह जिम्मेदारी मेरे लिए सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि अपने गृह नगर झाँसी और पूरे देश का गौरव वैश्विक मंच पर बढ़ाने का एक सुनहरा मौका है।
बृजेंद्र यादव: इस बड़े टूर्नामेंट के लिए टीम ने किस तरह की तैयारियां की हैं? भोपाल में लगा ट्रेनिंग कैंप कितना मददगार साबित हुआ?
केतन कुशवाहा: भोपाल कैंप हमारे लिए टर्निंग पॉइंट रहा है। वहां हमने बहुत कड़ी मेहनत की है। हमारे चीफ कोच (पूर्व दिग्गज) सरदार सिंह सर और रजनीश मिश्रा सर के मार्गदर्शन में हमने अपनी फिटनेस, पेनल्टी कॉर्नर और डिफेंसिव स्ट्रक्चर पर खास काम किया है। इस कैंप की सबसे अच्छी बात यह रही कि इसने हम सभी को मैदान के अंदर और बाहर एक मजबूत यूनिट में बदल दिया है।
बृजेंद्र यादव: एशिया कप से ठीक पहले टीम को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलने का मौका मिला। उस अनुभव को आप कैसे देखते हैं?
केतन कुशवाहा: ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत और आक्रामक टीम के खिलाफ खेलने से हमें अपनी कमजोरियों और ताकतों को करीब से जानने का मौका मिला। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव को कैसे संभालना है, यह हमने उस दौरे से सीखा। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिले अनुभवों ने हमारे खेल को बहुत निखारा है और हमारे संयोजन (Combinations) को बेहतर किया है।
बृजेंद्र यादव: जापान में 29 मई से यह महामुकाबला शुरू हो रहा है। एशिया की कई बेहतरीन युवा टीमें वहां होंगी। आपकी टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?
केतन कुशवाहा: एशिया कप में कोई भी टीम कमजोर नहीं होती, हर मैच महत्वपूर्ण है। हमारा पहला ही मैच 29 मई को कजाकिस्तान के खिलाफ है। लेकिन हमारी टीम अब एशिया की सर्वश्रेष्ठ युवा टीमों के सामने खुद को साबित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। हमारा एकमात्र लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ एशिया कप की ट्रॉफी जीतकर भारत लौटना है। हम किसी विरोधी को कम नहीं आंक रहे हैं, बल्कि अपनी योजनाओं को मैदान पर सही तरीके से लागू करने पर ध्यान दे रहे हैं।
बृजेंद्र यादव: कप्तान के तौर पर टीम और देश के फैंस के लिए आपका क्या संदेश है?
केतन कुशवाहा: कप्तान के तौर पर मेरा काम टीम को एकजुट रखना और हर खिलाड़ी का सर्वश्रेष्ठ बाहर लाना है। देश के फैंस से बस यही कहूंगा कि आप अपना समर्थन और दुआएं हमारे साथ रखें। हम मैदान पर अपना 100% देंगे और देश का नाम रोशन करने की पूरी कोशिश करेंगे।
बृजेंद्र यादव: शुभकामनाएँ केतन! उम्मीद है कि झाँसी का यह शेर जापान में तिरंगा लहराकर ही लौटेगा।केतन कुशवाहा: बहुत-बहुत धन्यवाद, जय हिंद!
