हॉकी लीजेंड अशोक ध्यानचंद के जन्मदिन पर विशेष:बृजेंद्र यादव

झांसी।भारतीय हॉकी के स्वर्णिम नायक अशोक कुमार ध्यानचंद एक महान विरासत के उत्तराधिकारी हैं।मेजर ध्यानचंद जैसे वैश्विक महानायक के बेटे होने के नाते अशोक कुमार पर हमेशा से उम्मीदों का भारी दबाव था। पिता ने कभी भी सीधे तौर पर बेटों को हॉकी खेलने के लिए विवश नहीं किया, लेकिन रगों में दौड़ते खेल के प्रति जुनून ने अशोक कुमार को मात्र 6 साल की उम्र में ही हॉकी स्टिक थामने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने अपनी असाधारण प्रतिभा के दम पर घरेलू प्रतियोगिताओं में जलवा बिखेरा और जल्द ही राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह पक्की कर ली। कुआलालंपुर 1975 विश्वकप में वह ऐतिहासिक विनिंग गोल भारतीय खेल इतिहास में अशोक कुमार का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने की सबसे बड़ी वजह 1975 का पुरुष हॉकी विश्व कप है। कुआलालंपुर (मलेशिया) में खेले गए इस कांटे के फाइनल मुकाबले में भारत का सामना धुर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से था।मैच बेहद रोमांचक मोड़ पर था और दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर थीं।ऐसे नाजुक मौके पर अशोक कुमार ने अपनी जादुई ड्रिबलिंग और सूझबूझ से पाकिस्तान के डिफेंस को भेदते हुए निर्णायक विनिंग गोल दागा था।इस ऐतिहासिक गोल की बदौलत भारत ने पाकिस्तान को 2-1 से हराकर पहली और एकमात्र बार हॉकी विश्व कप का खिताब अपने नाम किया।
अशोक कुमार ने अपने पूरे करियर में भारत की फॉरवर्ड लाइन को नई धार दी। उनके करियर के प्रमुख मील के पत्थर इस प्रकार हैं:
1975 कुआलालंपुर विश्व कप स्वर्ण पदक (ऐतिहासिक जीत),
1971 बार्सिलोना विश्व कप कांस्य पदक,
1973 एम्स्टर्डम विश्व कप रजत पदक,1972 म्यूनिख ओलंपिक कांस्य पदक,
1976 मॉन्ट्रियल ओलंपिक 7वां स्थान (भारत का प्रतिनिधित्व),
एशियाई खेल (1970, 1974, 1978) तीन लगातार रजत पदक।
खेल के मैदान पर उनके अविश्वसनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1974 में प्रतिष्ठित ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया था।
2024 में हॉकी इंडिया द्वारा मेजर ध्यानचंद लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार,
2013 में उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें राज्य के सर्वोच्च सम्मान यश भारती पुरस्कार से सम्मानित किया।
2020 में देश के सबसे बड़े प्रतिष्ठित क्लब मोहन बागान लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मान।
इसके साथ ही, खेल से संन्यास लेने के बाद भी वे विभिन्न माध्यमों से युवा प्रतिभाओं को तराशने और देश में हॉकी को बढ़ावा देने के मिशन में लगातार सक्रिय रहे हैं।अशोक कुमार केवल ध्यानचंद की विरासत के वाहक ही नहीं, बल्कि खुद में भारतीय हॉकी के एक ऐसे चमकते सितारे हैं, जिनकी फुर्ती और गोल करने की कला आज भी नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरित करती है। उनके जन्मदिन पर पूरा देश उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *