मर्यादा के साथ आदर्श जीवन जीना सिखाती है रामचरित मानस: जगतगुरु रामानंदाचार्य
*विश्व कल्याण की मंगल कामना के साथ पंच कुण्डीय सीताराम महायज्ञ शुरू
झांसी। केशवपुर धाम रजत जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में द्वितीय दिवस मंगलवार को देव स्थल खाती बाबा केशवपुर धाम में पं.बृजमोहन मिश्रा (गुरुजी) के पावन सानिध्य, कमेटी संरक्षक रामस्वरूप साहू एवं मेला प्रभारी राजकुमार साहू की देखरेख में ग्राम केशवपुर में मंगलवार से पंचकुंडीय श्रीसीताराम महायज्ञ एवं संगीतमय श्रीराकथा का शुभारंभ हो गया। उससे पूर्व विद्वान आचार्यो द्वारा मंत्रोच्चारण के बीच, श्री गणेश पूजन,पीठाधीश पूजन, वेदिका पूजन कर मंडप प्रवेश कराया गया। तदुपरांत यज्ञाचार्य हेमंत कौशिक हरपालपुर के आचार्यत्व में सभी 21 यजमानों श्रीमती शालिनी एकांश मिश्रा,प्रियंका सचिन साहू,सरिता अनूप सहगल,साधना आमोद किलपन, प्रगति अमित गंधी,उमा विनोद साहू बालाजी,मोहिनी सत्येंद्र सेन ग्वालियर, मधु राघवेन्द्र सेन खनियांधाना,मनीषा राहुल सोनी,खुशबू नितिन साहू,रिंकी राजू साहू, स्वाति प्रिंस अग्रवाल,जयंती राजकुमार साहू,प्रियंका राहुल शर्मा,पुष्पा दयाशंकर,राधा आशीष यादव, सीमा प्रदीप अग्रवाल,कल्पना पुष्पेन्द्र सेन एवं रीना अजय अग्रवाल आदि ने यज्ञ मंडप में बनी वेदियों का पूजन कर विश्व कल्याण की कामना के साथ आहुतियां दी।धाम पर अखण्ड श्री रामचरितमानस का पाठ, अखंड श्री सीताराम संकीर्तन एवं अखंड श्री हनुमान चालीसा का पाठ भी मंगलवार से प्रारंभ हो गया जो 3 सितम्बर तक अनवरत जारी रहेगा। साधु संतों एवं यजमानों को फलाहार एवं आम जनमानस को भण्डारा प्रसादी की व्यवस्था की गयी है जो प्रातः 11बजे से रात्रि 11बजे तक प्रतिदिन जारी रहेगी। दोपहर में चित्रकूट धाम से पधारे श्रीराम कथा के श्रेष्ठ वक्ता कामदगिरि पीठाधीश्वर जगतगुरु स्वामी रामानंदाचार्य ने अपने कोकिल कंठ से रसिक श्रद्धालुओं को संगीतमय श्रीराम कथा का रसास्वादन कराते हुए कहा कि रामचरित मानस हमें जीवन जीना सिखाती है।उत्कृष्ट चरित्र उसी का होता है जिसने अपने जीवन में मर्यादा का पालन किया हो। प्रभु राम ने अपने जीवन में सभी मर्यादाओं का विशेष ध्यान रखा है इसलिए वे मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाये। रामचरित मानस को आदि ग्रंथ एवं पंचम वेद बताते हुए उन्होंने कहा कि संस्कृत में रामायण की रचना करने वाले बाल्मीकि जी ने जनमानस को सरल हिंदी भाषा में भगवान के चरित्र का ज्ञान कराने हेतु गोस्वामी तुलसीदास के रुप में अवतार श्री राम चरित मानस की रचना की है। उन्होंने कहा कि मानस हृदय का पर्याय है। श्रीराम ने अपनी लीला में मानस को जोड़ा है और संदेश दिया कि जिस प्रकार मर्यादाओं का पालन उन्होंने किया वहीं सब हम सबको अपने जीवन में करना चाहिए। वे कहते हैं कि प्रभु श्रीराम ने अपने अवतार रुप में जन्म लीला, विवाह लीला,वन लीला,रणलीला और राज्य लीला यह पांच लीलाएं की हैं। संगीतमय श्रीराम कथा के प्रारंभ में केशवपुर धाम के गुरुजी पं. बिरजू महाराज ने चरण पूजन, पीठ पूजन एवं ग्रंथ का पूजन कर मानस की आरती उतारी एवं कथा व्यास का माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। जिला साधु संत परिषद के अध्यक्ष एवं छारद्वारी के महंत त्रिलोकी रामदास महाराज, साध्वी समीक्षा देवी चित्रकूट अन्य संत महंतों के साथ कथा श्रवण हेतु पधारे। गुरुजी पं.जगमोहन मिश्रा ने सभी संतों का माल्यार्पण एवं रामनाम की पट्टिका पहनाकर स्वागत किया।
रात्रि 8 बजे से बजरंग संकीर्तन मंडल शांति भवन के अध्यक्ष किशन लाल कुशवाहा, प्रभु दयाल साहू, रामस्वरूप साहू, जितेन्द्र साहू ओम प्रकाश साहू आदि कलाकारों श्री मेंहदीपुर बालाजी सरकार की भजन संध्या में श्री बालाजी सरकार, भैरब बाबा, प्रेतराज बाबा और मातारानी के भजन गाकर देर रात्रि श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रभु दयाल साहू ने गणेश वंदना के साथ भजन संध्या की शुरुआत की। उसके बाद उन्होंने गाया आना आना पवन कुमार हमारे हरि कीर्तन में, बालाजी महाराज तुम्हारी झांकी मन को मोहे, हृदय में सियाराम बिराजे आदि धार्मिक भजन सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।इस मौके पर श्रीमती साधना मिश्रा,राजेश कुमार शर्मा, राघव किलपन, सत्यम साहू डा.प्रदीप पाण्डेय, पवन,संजय कंचन,जैमिनी यादव, सचिन साहू,आशीष यादव,विनय जैन, शरद अग्रवाल, मुनीश यादव, बाली यादव, अंत में बैकुंठ प्रसाद चतुर्वेदी ने सभी का आभार व्यक्त किया।
