देहरादून ! देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी में आयोजित विधि सेमिनार में मुख्य अथिति के रूप में आमंत्रित, हाईकोर्ट झारखण्ड के निवर्तमान न्यायाधीश जस्टिस सुभाष चन्द ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि न्यायपालिका ही है विधि की सर्वोच्च संस्था एवं अदालत ही कानून की सदैव व्याख्या करती है जो समय समय पर नये निर्णयों द्वारा प्रतिपादित होती है
जस्टिस सुभाष चंद ने मानवाधिकारो पर व्याख्यान देते हुए बताया कि प्रतिष्ठा , समानता एवं स्वतंत्रता ये भारतीय संविधान ने भारतीय नागरिकों के लिए मौलिक अधिकार के रूप में दिये बुनियादी और जरूरी अधिकार हैं, जो उनके शारीरिक, मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास के लिए आवश्यक हैं।
कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप-प्रज्वलित कर गणेश वंदना के साथ हुआ जिसमे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अजय कुमार, प्रतिकुलपति प्रोफेसर ऋतिका मेहरा, विधिविभाग के संकायअध्यक्ष प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित एवं मुख्य अथिति जस्टिस सुभाष चंद्र शामिल हुए
मुख्य अथिति जस्टिस सुभाष चंद का स्वागत करते हुए प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित ने कहा कि न्यायमूर्ति ने स्वयं न्यायपालिका में न्यायाधीश रहते हुए अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिये सर्वोच्च न्यायालय का सहारा लिया औऱ नज़ीर से स्वयं के साथ साथ कई अन्य परिवादियों को न्याय प्राप्त हुआ, न्यायमूर्ति एक सामान्य परिवार के एकमात्र विधि के छात्र रहे है जिन्होंने अपनी मेहनत से हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति तक का पद ग्रहण किया
मुख्य अथिति जस्टिस सुभाष चंद ने विधि के छात्रों को प्रशस्ति पत्र देकर उनका हौसला बढ़ाया एवं आगे चल कर सिविल जज बनने का गुरुमंत्र भी दिया जिन्होंने यूनिवर्सिटी में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता बन कर प्रतिष्ठा अर्जित की
सेमिनार में स्कूल ऑफ़ लॉ के शिक्षक डॉ. गौरव त्यागी, डॉ. वैशाली शर्मा , सुश्री आकांशा भट्ट, हिमांशु जखमोला, एशवर्य गौरव, डॉ.विनोद जोशी, इशिका, डॉ. राजन हांडा एवं सुश्री स्माइल गोयल सहित विधि विभाग के छात्र छात्राये मौजूद रहे
