71 वर्ष पुरानी टूटी प्रथा सात सजावट चौकी से एक चौकी में सिमट गया मेला ग्रामीणों में रोष

*71 वर्ष पुरानी टूटी प्रथा सात सजावट चौकी से एक चौकी में सिमट गया मेला ग्रामीणों में रोष*

*50 प्रतिशत भी नहीं लगा मेला उसमें भी हुई मारपीट से ग्रामीणों में राजनीति की हो रही की चर्चा*

*अध्यक्ष करते रहे नेता जी का स्वागत मेले में हुई मारपीट सिर्फ दर्शक को पुलिस ने उठाया*

*नेवादा कौशाम्बी* चायल तहसील के औधन गांव में कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में पूर्वजों के द्वारा नवमी तिथि को विशाल मेला लगता था लगभग 71 वर्ष पूर्व यह मेला शुरू हुआ था इस मेले में इलाके के तमाम गांव के हजारों लोग मेला देखने पहुंचते थे मेले के बेहतर व्यवस्था की चर्चा होती थी लेकिन इस बार कुछ अलग देखने को मिला है कि जिनके पूर्वजों ने 71 वर्ष पहले बड़ी मेहनत से इस मेला को तमाम ग्रामीणों की सहमति से खड़ा किया था आज उन्ही ने सजावट चौकी बनाने के बाद मेले में सजावट चौकी लाने से इन्कार कर दिया है गांव में पूर्व में सजावट की सात चौकी आती थी जो कुछ दिन बाद आस पास के गांव की सजावट चौकी बंद हो गई थी लेकिन इस गांव की सजावट की चार चौकी निकलती थी और इस वर्ष मेला में सिर्फ एक सजावट चौकी मेला में लाई गई है आखिर बाकी के सजावट चौकी संचालकों और मेला अध्यक्ष के बीच क्या मतभेद हुआ जो सजावट चौकी तैयार करने के बाद सजावट चौकी घर पर ही रखी रह गई जो मेला में नहीं लाई गई यह ग्रामीणों में चर्चा का विषय है प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष दूर दराज से आने वाली दुकानें बहुत कम आ पाई है जिसका ग्रामीणों ने अनुमान लगाया है कि मेला 50 प्रतिशत ही लग पाया है जो धीरे धीरे टूटता जा रहा है जो ग्रामीणों में चिन्ता का विषय बना हुआ है कि आखिर 71 वर्ष पहले से लग रहे मेला को और पूर्वजों की धरोहर को संभालकर रखना और मेला को मेल से करवाना यह ग्रामीणों अथवा जिम्मेदारों की जिम्मेदारी है लेकिन इस बार मेला कमेटी अध्यक्ष की मनमानी व तानाशाही के चलते मेला धीरे धीरे टूटने के कगार पर जा रहा है

ग्रामीणों का मनना है कि पिछले वर्ष जिस प्रकार शान्ती पूर्वक मेला को पूर्व अध्यक्ष व जिम्मेदारों के द्वारा सम्पन्न कराया गया था कि दुकानदारों व दर्शकों के बीच काफी एकता महसूस किया गया था जो इस बार दर्शक और ग्रामीणों के बीच हुई मारपीट से ग्रामीणों में तमाम प्रकार की हो रही चर्चाओं पर जायें तो ग्रामीणों का कहना है कि मेला को ग्रामीणों के मेल से नहीं बल्कि राजनीतिक स्तर से मनमानी व तानाशाही ढंग से कराया जा रहा है और इस बार मेले में तमाम माननीय लोगों का आगमन हुआ एक तरफ मेले के मंच पर मेला अध्यक्ष ने नेता जी का जोरदार स्वागत करते रहे और वहीं दूसरी ओर मेले में पड़ोस के गांव से आये दर्शक व ग्रामीणों के बीच हुई मारपीट से ग्रामीणों के बीच हो रही तमाम प्रकार की चर्चाओं पर जायें तो राजनीति की बात सामने आ रही है और पुलिस ने इस मारपीट में सिर्फ दर्शक को ही उठाया मेले में मारपीट लड़ाई झगड़ा करने वालों को पुलिस ने निर्दोष मान लिया है जिससे पुलिस की भी कार्यवाही पर सवाल खड़े हो गए हैं

*रामबाबू केसरवानी पत्रकार अखंड भारत संदेश हिंदी दैनिक समाचार पत्र जनपद कौशाम्बी* 9473563534

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