दिल्ली।
डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने भारत पर एक बार फिर निशाना साधते हुए कह दिया कि भारत में ब्राह्मण ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं। नवारो की इस बेबुनियाद बात पर बीजेपी ही नहीं विपक्ष ने भी करारा हमला किया है। वहीं विपक्ष की दो नेताओं में इस मामले को लेकर बहस शुरू हो गई।
नवारो ने ‘फॉक्स न्यूज संडे’ से एक साक्षात्कार में कहा, ‘देखिए (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी एक महान नेता हैं।’ उन्होंने कहा कि मोदी दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के नेता हैं और उन्हें ‘समझ नहीं आता कि भारतीय नेता किस तरह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ सहयोग कर रहे हैं।’ नवारो ने कहा, ‘तो मैं बस इतना ही कहना चाहूंगा, भारतीय जनता कृपया समझिए कि यहां क्या हो रहा है। आपके पास ब्राह्मण हैं जो भारतीय लोगों की कीमत पर मुनाफाखोरी कर रहे हैं। हमें इसे रोकने की जरूरत है।’
नवारो के इस बयान पर शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी और टीएमसी नेता सागरिका घोष भिड़ गई हैं। घोष ने ट्वीट कर कहा कि बोस्टन ब्राह्मण अमेरिका में न्यू इंग्लैंड यानी धनी अभिजात वर्ग के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भाषी दुनिया में ब्राह्मण शब्द का इस्तेमाल आज भी एलीट्स के लिए होता है। वहीं जिस तरह की बहस चल रही है, सोशल मीडिया पर इस तरह की निरक्षरता हैरान करने वाली है।
सागरिका घोष की बात पर जवाब देते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि नवारो ने भले ही किसी विशेषाधिकार वर्ग के लिए ब्राह्मण शब्द का प्रयोग किया हो लेकिन इस तरह के नवारो की तरफ से अपनी बात रखना और विशेष जाति पहचान का हवाला देना शर्मनाक और भयावह है। उन्होंने कहा, अमेरिका के संदर्भ में ब्राह्मण शब्द को लेकर मुझे उपदेश ना दे। उन्होंने कहा कि अमेरिका का कोई वरिष्ठ नागरिक ऐसा बयान बिना वजह तो नहीं दे सकता, यह सब जानबूझकर किया गया है। ऐसे में इसपर व्याख्या देने से बचें।
वहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि अमेरिका को इस तरह के बेबुनियाद बयान नहीं देने चाहिए। नवारो व्यापार तथा शुल्क (टैरिफ) पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर वाशिंगटन और नयी दिल्ली के बीच रिश्तों में आयी गिरावट के बाद पिछले कुछ दिनों से लगातार भारत को निशाना बना रहे हैं। ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत पारस्परिक शुल्क और रूसी तेल की खरीद के लिए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाया है। भारत ने उस पर लगाए गए शुल्क को “अनुचित और विवेकहीन” बताया है।
