गर्भवती महिलाओं, नवजात, शिशु तथा बच्चों की करें विशेष देखभाल –सीएमओ*

कार्यालय मुख्य चिकित्सा अधिकारी झांसी द्वारा हीटवेव के गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों पर होने वाले दुष्प्रभाव के दृष्टिगत जारी की गई एडवाइजरी संबंधित

*गर्भवती महिलाओं व बच्चों को हीटवेव एवं हीटस्ट्रोक से बचाव हेतु स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी*

*गर्भवती महिलाओं, नवजात, शिशु तथा बच्चों की करें विशेष देखभाल –सीएमओ*

*सिर्फ एक अत्यधिक गर्म दिन भी बढ़ा सकता है जोखिम — सीएमओ*

*झांसी दि०- 21 मई 2026*

वर्तमान में जनपद सहित पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में अत्यधिक तापमान दर्ज किया जा रहा है, जिसका दुष्प्रभाव गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं तथा छोटे बच्चों पर अधिक पड़ रहा है। इसके दृष्टिगत स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं नवजात शिशु एवं छोटे बच्चों पर अत्यधिक तापमान के दुष्प्रभाव के संबंध में एडवाइजरी जारी करते हुए डॉ सुधाकर पांडेय मुख्य चिकित्सा अधिकारी झांसी ने बताया कि जनपद में लगातार 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तापमान बना हुआ है, जो कि गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आने से जटिलताओं का जोखिम बढ़ जाता है। समय से पहले जन्म, कम वजन का जन्म, मृत जन्म, भ्रूण-विकास संबंधी समस्याएं, प्री-एक्लैंपशिया, हीट स्ट्रोक या हीट एक्सर्शन, हार्मोनल उतार-चढ़ाव आदि जटिलताएं बढ़ जाती हैं। गर्मी के संपर्क में आने से गर्भवती महिलाओं की सेहत को नुकसान पहुंचता है और हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ता है। गर्भावस्था की किसी भी तिमाही में अधिक गर्मी के संपर्क में आने से प्रतिकूल गर्भावस्था का खतरा बढ़ सकता है। सिर्फ एक बहुत ज्यादा गर्म दिन भी यह जोखिम बढ़ा सकता है। बचाव के लिए आवश्यक है कि गर्भवती महिला के कमरे का तापमान ठंडा रखें, गर्भवती सुबह 11 से शाम 4 बजे तक घर में रहें,यही समय सबसे गर्म समय होता है। डिहाइड्रेशन से बचाव हेतु पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस,नींबू पानी, छाछ आदि का सेवन करें। शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने के लिए गीला तौलिया गर्दन, कलाई पर रखें। दिन में 2 बार नहाएं। हल्का सुपाच्य खाना खाएं, तला-भुना कम खाएं। खीरा, तरबूज, खरबूजा आदि मौसमी फल भोजन में सम्मिलित करें। चिकित्सक से ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच हर महीने कराएं। कोई भी गंभीर लक्षण जैसे- पेट में दर्द, ऐंठन, तेज सिरदर्द, चक्कर आना, झटके आना, धुंधलापन, घबराहट, तेज बुखार आदि दिखने पर देर न करते हुए तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।

डॉ सुधाकर पांडेय ने नवजात शिशु और छोटे बच्चों पर अत्यधिक गर्मी के दुष्प्रभावों के संबंध में बताया कि अत्यधिक गर्मी वयस्कों की तुलना में शिशुओं और छोटे बच्चों को अधिक प्रभावित करती है। शिशु अधिक संवेदनशील होते हैं क्योंकि उनका छोटा शरीर जल्दी गर्म हो जाता है और वह बड़े बच्चों या वयस्कों की तरह अपने शरीर के तापमान को प्रभावी ढंग से नियंत्रित नहीं कर पाते हैं। नवजात शिशु और छोटे बच्चों को हीट स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है। अत्यधिक गर्मी और लगातार पसीना आने के कारण बच्चों की त्वचा पर लाल चकत्ते, घमौरियां, खुजली, जलन और रैशेज, डिहाईड्रेशन जैसी समस्याएं तेजी से उभरने लगती हैं। छोटे बच्चों की त्वचा बेहद कोमल और संवेदनशील होती है, इसलिए बैक्टीरियल और फंगल संक्रमण का खतरा भी अधिक रहता है। सही देखभाल ही सबसे बड़ा बचाव है। शिशुओं को सीधी धूप से बचाएं और उन्हें ठंडी व हवादार जगह में रखें। बच्चों को सूती और हल्के कपड़े पहनाएं, शरीर के तापमान को बनाए रखें। पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ दें। लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। अत्यधिक तेज धूप में बच्चों को ना खेलने दें। बच्चों को घर का बना सुपाच्य व ताजा भोजन दें।

इसके अतिरिक्त यदि गर्भवती महिलाओं व बच्चों सहित किसी भी व्यक्ति में हीटवेव के लक्षण जैसे- तेज सिरदर्द, चक्कर आना, मतली-उल्टी, शरीर का तापमान बढ़ना, कमजोरी, पसीना आना बंद होना, प्यास अधिक लगना, त्वचा का सूखना और लालिमा होना, मनोदशा में बदलाव व भ्रम की अवस्था आदि दिखने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *