*बबीना विधानसभा की ग्राउंड रिपोर्ट: आखिर क्यों जनता के दिलों पर राज कर रहे हैं विधायक राजीव सिंह पारीछा?*
*जमीनी सक्रियता, संवेदनशीलता और ₹100 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों के दम पर बदली क्षेत्र की राजनीतिक तासीर; हर वर्ग जता रहा अटूट भरोसा*
*विशेष राजनीतिक विश्लेषण*
झांसी । उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुंदेलखंड का अपना एक अलग और बेहद संवेदनशील मिजाज रहा है। यहाँ की जनता जितनी भावुक है, बुनियादी सुविधाओं को लेकर उतनी ही मुखर भी रही है। इसी बुंदेलखंड की सबसे हॉट और महत्वपूर्ण सीटों में शुमार 222-बबीना विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों एक नई राजनीतिक कार्यशैली और जननेता की लोकप्रियता की चौतरफा चर्चा है। यह जननेता कोई और नहीं, बल्कि क्षेत्र के लोकप्रिय भाजपा विधायक राजीव सिंह पारीछा हैं। अमूमन चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधियों और आम जनता के बीच दूरियां बढ़ जाती हैं, लेकिन बबीना में इसके उलट विधायक की जमीनी सक्रियता और लोकप्रियता का ग्राफ रिकॉर्ड रफ़्तार से बढ़ रहा है। आइए समझते हैं कि बबीना की देवतुल्य जनता आज विधायक राजीव सिंह पारीछा के बारे में क्या सोचती है और उनकी इस बढ़ती लोकप्रियता के मुख्य स्तंभ क्या हैं।
1. *अन्नदाताओं की सोच: “पानी के संकट के भगीरथी मसीहा”*
बुंदेलखंड के बबीना, चिरगांव और बड़ागांव ब्लॉक के किसानों के लिए पानी हमेशा से जीवन-मरण का प्रश्न रहा है। क्षेत्र के किसानों का स्पष्ट मानना है कि विधायक राजीव सिंह पारीछा ने उनकी इस सबसे दुखती रग को समझा है। ‘समृद्ध किसान – सशक्त क्षेत्र’ के संकल्प के तहत पूरी विधानसभा में 335 ब्लास्ट कूपों का निर्माण और लघु सिंचाई विभाग के माध्यम से ₹2.39 करोड़ की लागत से बनने वाले चेकडैमों को ग्रामीण अंचल में एक “भगीरथी प्रयास” के रूप में देखा जा रहा है। किसानों का सोचना है कि गिरते भूजल स्तर में इस अभूतपूर्व सुधार से अब उनके कुएं और नलकूप साल भर पानी देंगे, जिससे सिंचाई की लागत घटेगी और पैदावार बढ़ेगी।
2. *ग्रामीण और मध्यम वर्ग का मत: “दलालों से मुक्ति और सुलभ संवाद”*
ग्रामीण क्षेत्र के सीधे-साधे लोगों के बीच विधायक की छवि एक बेहद सरल और चौबीसों घंटे सुलभ रहने वाले जनसेवक की है। लक्ष्मीगेट बाहर, ओम शांति नगर स्थित कैंप कार्यालय पर उनके द्वारा शुरू किया गया अत्याधुनिक ‘जन-सहयोग केंद्र’ आज आम जनता के लिए वरदान साबित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि आधार कार्ड, राशन कार्ड या अन्य सरकारी दस्तावेजों में संशोधन और तकनीकी मार्गदर्शन के लिए अब उन्हें दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते और न ही दलालों का शिकार होना पड़ता है। जनता सोचती है कि विधायक ने अपने कैंप कार्यालय को प्रशासनिक और सामाजिक समस्याओं का ‘वन-स्टॉप सॉल्यूशन’ बना दिया है।
3. *युवा पीढ़ी की नजर में: “शिक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास पुरुष”*
बबीना विधानसभा के युवाओं और भावी पीढ़ी के बीच विधायक पारीछा की छवि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘मिशन 2027’ को धरातल पर उतारने वाले एक विज़नरी लीडर की है। ग्राम बैदौरा में ₹23.79 करोड़ की भारी-भरकम लागत से बना ‘मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय’ इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। अभिभावकों और युवाओं का सोचना है कि अब ग्रामीण बच्चों को भी कॉन्वेंट जैसी विश्वस्तरीय शिक्षा मुफ्त में मिल सकेगी। इसके साथ ही हीरापुर-बुडपुरा से हरपालपुर तक बनी ₹173.07 लाख की पक्की डामर सड़क और पहुज व बेतवा नदी पर बने मजबूत पुलों ने क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई रफ़्तार दी है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं।
4. *गरीब और वंचित वर्ग का विश्वास: “असाधारण संवेदनशीलता”*
राजीव सिंह पारीछा को केवल एक राजनेता से ऊपर उठाकर जन-जन का चहेता बनाने में उनके मानवीय दृष्टिकोण का सबसे बड़ा हाथ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘क्षय रोग मुक्त भारत’ अभियान से प्रेरित होकर उन्होंने जिस तरह 5 टीबी रोगियों को व्यक्तिगत रूप से गोद लिया, उन्हें पोषण पोटली बांटी और अपने निजी प्रयासों से ₹6,000 प्रति माह की आर्थिक सहायता की स्थाई व्यवस्था सुनिश्चित कराई, उसकी समूचे झांसी जनपद में सराहना हो रही है। गरीब और वंचित वर्ग आज उन्हें अपने रक्षक और परिवार के एक सदस्य के रूप में देखता है।
🎯 *राजनीतिक निष्कर्ष*
बबीना विधानसभा क्षेत्र का गहन विश्लेषण करने पर साफ नजर आता है कि राजीव सिंह पारीछा ने ‘शिक्षित बबीना – विकसित बबीना’ के अपने नारे को केवल कागजों पर नहीं बल्कि धरातल पर सच साबित किया है। उनका सरल स्वभाव, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और जनता के सुख-दुख में आधी रात को भी खड़े रहने का जज्बा ही उनकी लोकप्रियता की असली चाबी है। यही कारण है कि आगामी राजनीतिक चुनौतियों और ‘मिशन 2027’ के मोर्चे पर बबीना की जनता आज पूर्ण विश्वास के साथ अपने इस चहेते विधायक के पीछे मुस्तैदी से खड़ी दिखाई दे रही है।
