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टहरौली थानाक्षेत्र के ग्राम घुरैया में गुंडों का ताण्डव, तमाशबीन बनी पुलिस

महिला से मारपीट, अभद्रता और जान से मारने की धमकी के आरोप, फिर भी दो दिन तक खामोश रही टहरौली पुलिस

टहरौली पुलिस द्वारा न्याय न मिलने पर पीड़िता ने खटखटाया एसएसपी का दरवाजा

टहरौली (झाँसी) – झाँसी के टहरौली थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। थाना क्षेत्र के ग्राम घुरैया निवासी एक महिला ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक झाँसी को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि खेत पर काम के दौरान उसके साथ मारपीट, अभद्रता, अश्लील हरकतें, कपड़े खींचने, जान से मारने की धमकी और रंगदारी की मांग जैसी गंभीर घटनाएं हुईं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि पीड़िता का कहना है कि शिकायत दिए जाने के दो दिन बाद भी टहरौली पुलिस ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद उसे न्याय की उम्मीद में सीधे एसएसपी कार्यालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

पीड़िता द्वारा दिये गये शिकायती पत्र के अनुसार, घटना 18 जुलाई 2026 की दोपहर की बताई गई है। पीड़िता का आरोप है कि वह अपनी जेठानी और पुत्री के साथ खेत पर मूंगफली की गुड़ाई कर रही थी, तभी गांव के ही कुछ लोग वहां पहुंचे और गाली-गलौज, मारपीट तथा महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया। शिकायती पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि विरोध करने पर महिलाओं के साथ हाथापाई की गई, कपड़े खींचे गए और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।

पीड़िता ने अपने शिकायती पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि आरोपितों ने दो लाख रुपये की अवैध मांग की तथा घटना का वीडियो बनाने का प्रयास करने पर मोबाइल छीनने की कोशिश की। साथ ही शिकायत करने पर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है और पुलिस की ओर से इस संबंध में सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं, तो इतने गंभीर आरोपों के बावजूद स्थानीय पुलिस की कथित निष्क्रियता कई सवाल खड़े करती है। महिलाओं की सुरक्षा और गंभीर आपराधिक आरोपों पर त्वरित कार्रवाई की जिम्मेदारी पुलिस की होती है। ऐसे मामलों में देरी न केवल पीड़ित का भरोसा कमजोर करती है, बल्कि कानून के प्रति आम लोगों के विश्वास को भी प्रभावित करती है।

टहरौली पुलिस की कार्यप्रणाली पहले भी सवालों के घेरे में रही है और अब यह नया मामला उन सवालों को और गहरा करता दिखाई दे रहा है। यदि पीड़ित पक्ष को स्थानीय स्तर पर समय पर सुनवाई नहीं मिलती और उसे वरिष्ठ अधिकारियों तक गुहार लगानी पड़ती है, तो यह व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। पुलिस की निष्पक्षता केवल कार्रवाई में नहीं, बल्कि कार्रवाई की तत्परता में भी दिखाई देती है।

फिलहाल पूरा मामला वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक झाँसी के संज्ञान में पहुंच चुका है। अब देखने वाली बात होगी कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई होती है या नहीं।

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