*महंगा नहीं, सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल! UAE के एक फैसले ने कैसे पलटा गेम, भारत को क्या फायदा? बिखर जाएगा OPEC?*
*यूरोप जाते वक्त UAE भी जा सकते हैं पीएम मोदी, मई में चार देशों की करेंगे यात्रा*
* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने यूएई यात्रा पर भी जा सकते हैं।
* मई में वो यूरोप के चार देशों की यात्रा पर जाने वाले हैं और रास्ते में कुछ घंटों के लिए संयुक्त अरब अमीरात में ठहर सकते हैं।
* भारत और यूएई के बीच कूटनीतिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।
*वैश्विक तेल और गैस संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी का संयुक्त अरब अमीरात में थोड़ी देर भी रुकना, जियोपॉलिटिक्स के लिए भी काफी मायने रखता है।*
*खाड़ी देशों में भारत का ‘सीक्रेट’ मिशन! ईरान युद्ध के बीच एक्शन में अजीत डोभाल, सऊदी अरब के बाद UAE क्यों पहुंचे?*
* डोभाल की UAE यात्रा, पिछले हफ्ते सऊदी अरब की उनकी हालिया यात्रा के बाद हुई है।
* यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर खाड़ी देशों के साथ भारत के चल रहे कूटनीतिक संपर्क अभियान का हिस्सा है।
*यूएई ने तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक और ओपेक प्लस से अलग होने का ऐलान कर दिया है।*
* यूएई भारत को बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति करता है।
* यूएई के साथ रिश्ते मजबूत करने के लिए इस फैसले से पहले ही भारत के एनएसए अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दौरे किए थे।
*भारत की सरकारी रिफाइनरी कंपनियां इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम का पहले से ही यूएई की एडनॉक और अन्य कंपनियों के साथ सहयोग है। ये रिफाइनिंग के क्षेत्र में मिलकर काम करती हैं।*
*ग्लोबल एनर्जी मार्केट में वो ‘महा-धमाका’ हो गया है, जिसकी गूंज दशकों तक सुनाई देगी.*
● संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दुनिया के सबसे ताकतवर तेल संगठन OPEC और OPEC+ को अलविदा कहने का फैसला किया है.
● 1960 के दशक से इस क्लब का अहम हिस्सा रहा यूएई 1 मई 2026 से अपनी तेल नीति को लेकर पूरी तरह स्वतंत्र होगा.
● मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल उत्पादन की सीमाओं को लेकर चल रहे मतभेदों के बीच यूएई का यह ‘एग्जिट’ (Exit) पूरी दुनिया के लिए किसी शॉक से कम नहीं है.
*● वजह:* यूएई लंबे समय से उत्पादन बढ़ाना चाहता था, लेकिन ओपेक की ‘कोटा राजनीति’ उसे रोक रही थी. साथ ही हालिया भू-राजनीतिक तनाव ने आग में घी का काम किया.
*● UAE की ताकत:* 4.8 मिलियन (48 लाख) बैरल प्रतिदिन तेल उत्पादन की क्षमता. ओपेक के कुल उत्पादन में यूएई का हिस्सा 13-14% था.
*● बाजार पर असर:* यूएई के बाहर निकलते ही तेल की सप्लाई बढ़ेगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें गिरने की पूरी उम्मीद है.
*● भारत को फायदा:* कच्चा तेल सस्ता होने से भारत का इम्पोर्ट बिल घटेगा और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है.
*● मुख्य वजह है-* ‘उत्पादन की भूख’. यूएई ने अपनी तेल क्षमता बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश किया है. वर्तमान में वह हर दिन 4.8 मिलियन बैरल तेल निकाल सकता है, लेकिन ओपेक के नियमों के कारण उसे कम उत्पादन करना पड़ता था ताकि कीमतें ऊंची बनी रहें. यूएई अब अपनी शर्तों पर ‘वॉल्यूम’ (ज्यादा मात्रा) बेचना चाहता है ताकि वह अपनी इकोनॉमी को तेल से आगे ले जाने (Vision 2031) के लिए फंड जुटा सके.
*● कतर और अंगोला के बाद यूएई तीसरा बड़ा देश है जिसने ओपेक का साथ छोड़ा है. यूएई ओपेक का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है.
● यूएई के जाने के बाद इराक और कुवैत जैसे अन्य सदस्य भी अपनी उत्पादन सीमा को लेकर विद्रोह कर सकते हैं. यह संगठन के अस्तित्व के लिए ‘ब्लैक होल’ साबित हो सकता है.
● यूएई जानता है कि आने वाले 20-30 सालों में दुनिया रिन्यूएबल एनर्जी (सौर और हाइड्रोजन) पर शिफ्ट हो जाएगी. ऐसे में वह अपने पास मौजूद ‘काला सोना’ (तेल) को जल्द से जल्द बेचकर उस पैसे को ‘टेक्नोलॉजी’ और ‘पर्यटन’ में निवेश करना चाहता है. ओपेक की कटौती नीति यूएई के लिए “आज के मुनाफे को कल के लिए छोड़ना” जैसी थी, जो उसे मंजूर नहीं था.
*यूएई का संगठन छोड़ना इस बात का संकेत है कि अब दुनिया में तेल की कीमतों पर किसी एक संगठन (OPEC) की मोनोपॉली (एकाधिकार) खत्म हो रही है. अब ‘मार्केट फोर्स’ तय करेंगे कि तेल की कीमत क्या होगी. निवेशकों के लिए यह पेंट, टायर, एयरलाइंस और लॉजिस्टिक सेक्टर की कंपनियों में खरीदारी का बड़ा सिग्नल हो सकता है.*
