मीडिया के तीखे
सवालों के जवाब तक नहीं दे पाया! भाग गया..
बालाघाट का इतिहास जानना था पहले
सरकार ने बीमारी पर काबू पाकर 1000 से अधिक बच्चों को हॉस्पिटल ले जाकर ठीक करवाया है जबकि ये स्थानीय लोग हॉस्पिटल की जगह इलाज झाड़ फूंक से करने वाले अंधविस्वास पर भरोसा करते थे फिर भी सभी का इलाज हो रहा है वही गाँव वालों ने भी भगा दिया उन्होंने कहा हमारे बच्चे स्कूल जाते है और राशन भी सरकार दे रही है बस सुनते ही कॉकरोच हुआ जंतर मंतर छू मंतर । *इतने दिन कहां थे कोकरोच ? अब लाशों पर राजनीति करने आए हैं?* ”
मध्य प्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत के मामले में देरी से पहुंचने पर स्थानीय पत्रकारों द्वारा सवाल उठाए जाने पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने माफी मांगी।
अभिजीत दीपके मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी गांवों (जैसे अदोरी, कोरका और बोंदारी) में बच्चों की मौत के सिलसिले में संवेदना व्यक्त करने और स्थिति का जायजा लेने पहुंचे थे।
बालाघाट पहुंचने पर स्थानीय पत्रकारों और मीडियाकर्मियों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया और सवाल किया कि, “इतने दिन कहां थे? अब लाशों पर राजनीति करने आए हैं?”
तीखे सवालों का सामना करते हुए अभिजीत दीपके ने देरी से आने की बात स्वीकार की और पत्रकारों के सामने हाथ जोड़कर माफी मांगते हुए नजर आए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।अभिजीत दिपके 30 बच्चों की मौत का मामला उठाने पहुंचेMP,
पहुंचते ही मांगने लगे माफी
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बीते तीन महीनों के दौरान करीब 30 आदिवासी बच्चों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद यह मामला पूरे प्रदेश में गर्माया हुआ है। इसी दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी शुक्रवार को सोशल मीडिया के जरिए इस मुद्दे का जिक्र करते हुए बालाघाट आने की बात कही थी और कहा था कि वे फिलहाल उसी के रास्ते में ही हैं। शनिवार की सुबह जब अभिजीत दिपके बालाघाट के एक गांव में पहुंचे तो वहां उनका अनुभव कुछ अच्छा नहीं रहा। दरअसल वहां पहुंचते ही पहले से मौजूद स्थानीय पत्रकारों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया और उन पर सवालों की बौछार कर दी। कॉकरोच पार्टी के प्रमुख से उन्होंने इतनी देरी से बालाघाट आने के बारे में सवाल पूछा, जिसके बाद दिपके देरी से आने की बात मानी और अपनी इस गलती के लिए वे पत्रकारों से क्षमा (माफी) मांगते हुए नजर आए।
